Saturday, January 31, 2009

मेरी याद …


मेरी यही चाहत थी की तुम हमारी ज़िन्दगी में आओ ,
लेकिन ये हो न सका और अब हम अपनी तकदीर पर रोते हैं

नींद तो नही आती है रातो को लेकिन ,
फिर भी कभी खवाबो में आओ इसी उम्मीद से सोते हैं

याद न करोगे ,तो भुला भी न सकोगे ,
मेरा ख्याल ज़हन से मिटा भी न सकोगे

एक बार जो तुम मेरे गम से मिलोगे ,
तो सारी उमर मुस्करा ना सको गे ।

वो तलाशता रहा मुझे डगर डगर ,
उन्हें हमारी तालाश थी ,

पर अफ़सोस जिस कबर पे थे कदम उनके ,
उसी में हमारी लाश दफन थी ………

याद न करोगे ,तो भुला भी न सकोगे ,
मेरा ख्याल जेहन से मिटा भी न सकोगे

एक बार जो तुम मेरा गम से मिलोगे ,
तो सारी उमर मुस्करा न सको गे ………

No comments: