दर्द जब भी उभरे मरे सिने मैं ,
करार तुझको न आए जीने मैं....
गम का पहाड़ तुझपे टूटे इस कदर ,
उम्र कट जाए आंसू पिने मैं .....
मौत मांगे मगर तुझे मौत न मिले ,
जिंदगी बोझ लगने लगे, तुझे जीने मैं ..
तू चाहकर भी किसी की हो न सके ,
जैसे अंगूठी होती है, नगीने मैं....
तू तडपे तो , दर्द ऐसा उठे ,
जैसी उठता है , आज मेरे सिने मैं ...
दर्द जब भी उभरे मरे सिने मैं ,
करार तुझको न आए , जीने मैं ......!!!!
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