Saturday, January 31, 2009

उसे एहसास जाने कब होगा …


मैं अपनी जिंदगी न खो बैठूं
मैं अपनी हर खुशी ना गँवा बैठूं

उसे खबर है सब मगर ..........

नजाने क्यूँ मुझे रुलाता है
न जाने क्यूँ मुझे सताता है

मैं खिलखिलाता हूँ बस उस के लिए
मैं रो भी जाता हूँ तो उस के लिए

उसे एहसास जाने कब होगा !!!

तमाम उमर फिर वोह तड़पेगी मेरे लिए

फिर वोह चाहेगी भी तो क्या होगा
फिर वोह आवाज़ भी देगा तो क्या होगा

फिर चाह केर भी न कुछ होगा
फिर हर तरफ़ खामोशी होगी

उससे हेर पल याद दिलाएगी
जो उसे हर घड़ी सताएगी

मैं अपनी हेर खुशी गँवा बेठा
मैं अपनी जिंदगी को खो बेठा

उसे एहसास जाने कब होगा …….!!!

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